दिल्ली में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने इंसानियत और भरोसे दोनों को झकझोर कर रख दिया है। राजधानी के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में एक ड्राइवर ने अपने मालिक के परिवार के साथ सालों पुराने रिश्ते का गलत फायदा उठाया और बुजुर्ग के बैंक खाते से लाखों रुपये निकाल लिए। आरोपी पिछले करीब 15 साल से परिवार के साथ काम कर रहा था और घर के लोगों का भरोसेमंद माना जाता था।
जानकारी के अनुसार, आरोपी ने घर के बुजुर्ग की बीमारी का फायदा उठाया। बुजुर्ग अल्जाइमर यानी भूलने की बीमारी से पीड़ित हैं। इसी वजह से उन्हें कई बातों की याद नहीं रहती थी। आरोपी को इस बात की पूरी जानकारी थी और उसने इसी कमजोरी का फायदा उठाकर धीरे-धीरे पैसे ट्रांसफर करने शुरू कर दिए।
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने 4 अप्रैल 2026 से 15 अप्रैल 2026 के बीच UPI ट्रांजेक्शन के जरिए करीब 2.57 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए। शुरुआत में परिवार को लगा कि किसी साइबर ठग ने अकाउंट हैक कर लिया है। इसके बाद शिकायतकर्ता नितिन गोयल ने NCRP पोर्टल और साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
जांच शुरू होने के बाद पुलिस ने बैंक खातों और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की डिटेल खंगाली। तकनीकी जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि पैसे जिन खातों में भेजे गए थे, उनका कनेक्शन परिवार के ड्राइवर देविंदर से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया कि आरोपी घर में काम करते समय मौका देखकर बुजुर्ग का मोबाइल फोन इस्तेमाल करता था और फिर UPI के जरिए पैसे ट्रांसफर कर देता था।
बताया जा रहा है कि आरोपी को भरोसा था कि अल्जाइमर की वजह से बुजुर्ग को इन लेनदेन की कोई याद नहीं रहेगी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने 5 मई को अचानक नौकरी छोड़ दी और फरार हो गया, ताकि किसी को उस पर शक न हो।
हालांकि साइबर पुलिस ने तकनीकी जांच के जरिए आरोपी तक पहुंच बनाई और उसे 8 मई को GTB नगर इलाके से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि घरवालों के भरोसे की वजह से उसे मोबाइल और घर के कई जरूरी सामान तक आसानी से पहुंच मिल जाती थी।
फिलहाल पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है और ठगी गई रकम वापस दिलाने की कोशिश की जा रही है। इस घटना ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि भरोसा करते समय भी सतर्क रहना कितना जरूरी है।