राज्यसभा चुनाव 2026 के नतीजों के साथ ही Indian National Congress की अंदरूनी स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बिहार, ओडिशा और हरियाणा में सामने आई घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि पार्टी अपने विधायकों को एकजुट रखने में संघर्ष कर रही है।
बिहार में कांग्रेस के तीन विधायक वोटिंग के दिन अचानक गायब हो गए, जिससे महागठबंधन की रणनीति को बड़ा झटका लगा। पार्टी ने Amarendra Dhari Singh का समर्थन किया था, लेकिन विधायकों की अनुपस्थिति ने विपक्ष की स्थिति कमजोर कर दी।
बिहार कांग्रेस अध्यक्ष Rajesh Ram ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके विधायकों से अचानक संपर्क टूट गया और यह स्पष्ट नहीं हो सका कि वे कहां चले गए।
ओडिशा में स्थिति और भी गंभीर रही, जहां कांग्रेस के तीन विधायकों ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर Dilip Ray के पक्ष में वोट कर दिया। इस घटना के बाद पार्टी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित विधायकों को निलंबित कर दिया।
हरियाणा में भी क्रॉस वोटिंग ने कांग्रेस को झटका दिया। यहां पार्टी ने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति अपनाई थी, लेकिन इसके बावजूद कुछ विधायकों ने पार्टी के निर्देशों का पालन नहीं किया।
इन घटनाओं ने पार्टी नेतृत्व, खासकर Mallikarjun Kharge के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पार्टी जल्द ही अनुशासन मजबूत नहीं करती, तो आने वाले चुनावों में उसे और नुकसान उठाना पड़ सकता है।
फिलहाल कांग्रेस ने इन मामलों में सख्त कार्रवाई का संकेत दिया है। हरियाणा में क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों को नोटिस जारी करने की तैयारी है, जबकि ओडिशा में पहले ही निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है।
कुल मिलाकर, राज्यसभा चुनाव ने कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। अब देखना होगा कि पार्टी इन चुनौतियों से कैसे उबरती है और भविष्य में खुद को किस तरह मजबूत बनाती है।