लखनऊ। प्रदेश में बढ़ती गर्मी के साथ बिजली की मांग में तेजी देखी जा रही है, लेकिन इस बार खपत बढ़ने की एक बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां भी बन गई हैं। अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे एलपीजी सिलिंडर की उपलब्धता पर असर पड़ा है। परिणामस्वरूप लोग खाना बनाने के लिए गैस के बजाय बिजली से चलने वाले उपकरणों का उपयोग करने लगे हैं।
ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार मार्च की शुरुआत में बिजली की मांग करीब 19 हजार मेगावाट थी। हालांकि कुछ ही दिनों में यह तेजी से बढ़कर 21 हजार मेगावाट से अधिक हो गई। 10 मार्च को प्रदेश में बिजली की खपत लगभग 21,678 मेगावाट दर्ज की गई।
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मौसमी परिस्थितियों के अनुसार इस समय बिजली की मांग 18 से 19 हजार मेगावाट के आसपास होनी चाहिए थी। लेकिन गैस की कमी के कारण घरेलू उपभोक्ता अधिकतर काम बिजली से चलने वाले उपकरणों के माध्यम से कर रहे हैं।
इसका असर खासतौर पर शहरी इलाकों में अधिक देखने को मिल रहा है। विभाग के अनुसार सुबह और शाम के समय बिजली की मांग में अधिक उछाल देखा जा रहा है। इन घंटों के दौरान शहरी फीडरों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि बिजली आपूर्ति बाधित न हो।
बढ़ती मांग का असर बाजारों में भी देखने को मिल रहा है। लखनऊ के गोमती नगर में इंडक्शन चूल्हों के व्यापारी राजेश चंद्रा बताते हैं कि पिछले कुछ दिनों में बिक्री में काफी वृद्धि हुई है। पहले जहां सीमित संख्या में इंडक्शन चूल्हे बिकते थे, वहीं अब मांग इतनी बढ़ गई है कि उन्हें कई कंपनियों के उत्पाद मंगाने पड़ रहे हैं।
नाका बाजार के व्यापारी मनोज गुप्ता का कहना है कि पहले उनके यहां प्रतिदिन औसतन 10 से 20 इंडक्शन चूल्हे बिकते थे, लेकिन पिछले सप्ताह से यह संख्या बढ़कर 50 से अधिक हो गई है। इसी तरह इमर्शन रॉड और अन्य इलेक्ट्रिक उपकरणों की मांग भी बढ़ गई है।
प्रतिदिन बिजली की खपत
बिजली विभाग का कहना है कि बढ़ती मांग के बावजूद प्रदेश में बिजली की कोई कमी नहीं है। यूपी पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल के अनुसार उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है और वितरण कंपनियां 32 हजार मेगावाट से अधिक आपूर्ति का लक्ष्य लेकर काम कर रही हैं।