अमेरिका की नई टैरिफ नीति ने वैश्विक व्यापार समीकरणों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित नए फैसले के तहत भारत पर लगाया गया टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है, जो कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले कम है। यह संकेत देता है कि अमेरिका भारत को एक अहम व्यापारिक साझेदार के रूप में देख रहा है।
जहां भारत को राहत दी गई है, वहीं कुछ देशों पर अमेरिका ने भारी टैरिफ लगाए हैं। ब्राजील पर 50 प्रतिशत, म्यांमार और लाओस पर 40-40 प्रतिशत, जबकि चीन पर 37 प्रतिशत टैरिफ लागू है। दक्षिण अफ्रीका को 30 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है। इन आंकड़ों से साफ है कि अमेरिका अपनी व्यापार नीति में रणनीतिक संतुलन साध रहा है।
दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों की बात करें तो बांग्लादेश और वियतनाम पर 20 प्रतिशत, मलेशिया, कंबोडिया और थाईलैंड पर 19 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है। पाकिस्तान भी 19 प्रतिशत टैरिफ की श्रेणी में आता है। ऐसे में भारत का 18 प्रतिशत टैरिफ उसे इस क्षेत्र में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रखता है।
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अमेरिका अपने सबसे करीबी सहयोगी देशों—यूनाइटेड किंगडम से 10 प्रतिशत और यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया व स्विट्जरलैंड से 15 प्रतिशत टैरिफ वसूल रहा है। भारत अभी इन देशों से थोड़ा ऊपर है, लेकिन चीन और ब्राजील जैसे देशों की तुलना में काफी बेहतर स्थिति में पहुंच गया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर भारत रूस से तेल आयात पर स्पष्ट रणनीति अपनाता है, तो भविष्य में अतिरिक्त टैरिफ हटने की संभावना भी बन सकती है। इससे भारत-अमेरिका व्यापार और मजबूत होगा और भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में नई गति मिलेगी।