सूफी संगीत पर सोनू निगम की टिप्पणी से छिड़ी बहस

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  •  सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध आमने-सामने

प्रसिद्ध गायक सोनू निगम एक बार फिर अपने बेबाक बयान की वजह से सुर्खियों में हैं। इस बार उनका बयान सूफी संगीत को लेकर है, जिसने सोशल मीडिया पर नई बहस को जन्म दे दिया है। वायरल हो रहे एक वीडियो में सोनू निगम यह कहते दिखाई दे रहे हैं कि किसी गीत में अल्लाह या मौला जैसे शब्द जोड़ देने से वह सूफी नहीं बन जाता।

सोनू निगम का मानना है कि सूफी कोई संगीत शैली नहीं बल्कि एक विचारधारा और जीवन दर्शन है। उन्होंने कहा कि सूफी शब्द का इस्तेमाल आजकल फैशन की तरह किया जा रहा है, जबकि इसकी असली पहचान इससे कहीं अलग है। उनके मुताबिक, 2000 के बाद ‘सूफी म्यूजिक’ शब्द को लोकप्रिय बनाया गया, जबकि उससे पहले इसे इस तरह वर्गीकृत नहीं किया जाता था।

इस बयान के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का सैलाब आ गया। कई यूजर्स ने सोनू निगम का समर्थन करते हुए कहा कि वह संगीत की गहराई और इतिहास को बेहतर तरीके से समझते हैं। समर्थकों का कहना है कि आज के दौर में सूफी शब्द का इस्तेमाल सिर्फ भावनात्मक असर पैदा करने के लिए किया जा रहा है।

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वहीं, बड़ी संख्या में लोगों ने सोनू निगम की आलोचना भी की। विरोध करने वालों का कहना है कि सूफी परंपरा में संगीत हमेशा से एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। कुछ यूजर्स ने अमीर खुसरो की कव्वालियों का हवाला देते हुए कहा कि सूफी संगीत की विरासत सदियों पुरानी है और इसे इस तरह नकारा नहीं जा सकता।

बहस यहीं नहीं रुकी। कुछ लोगों ने इस मुद्दे को धार्मिक दृष्टिकोण से भी देखा और सवाल उठाया कि अगर इस्लाम में संगीत को लेकर मतभेद हैं, तो सूफी संगीत की परंपरा कैसे विकसित हुई। वहीं, कई लोगों ने इसे एक कलाकार की निजी राय बताते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन किया।

सोनू निगम इससे पहले भी विवादों से दूर नहीं रहे हैं। साल 2017 में अजान को लेकर दिए गए उनके बयान ने बड़ा हंगामा खड़ा कर दिया था। उस समय उनके खिलाफ फतवे तक की बात सामने आई थी, जिसके बाद उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से अपना सिर मुंडवा लिया था। वह मामला काफी समय तक चर्चा में रहा, लेकिन बाद में ठंडा पड़ गया।

इस बार भी सोनू निगम का बयान एक बार फिर यह दिखाता है कि जब कला और आस्था का मेल होता है, तो विचारों का टकराव होना स्वाभाविक है। हालांकि, यह विवाद यह भी दर्शाता है कि आज सोशल मीडिया के दौर में किसी भी बयान की प्रतिक्रिया तुरंत और तीव्र होती है।

फिलहाल सोनू निगम के इस बयान पर बहस जारी है और यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और चर्चाओं का केंद्र बना रह सकता है।

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