लखनऊ : में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगभग 230 करोड़ रुपये की लागत से बने राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल का भव्य उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने अटल जी की प्रसिद्ध पंक्तियां “परहित अर्पित अपना तन-मन” सुनाते हुए उनके विचारों, सुशासन की सोच और राष्ट्र निर्माण में योगदान को याद किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 25 दिसंबर का दिन भारत के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसी दिन अटल बिहारी वाजपेयी और महामना मदन मोहन मालवीय जैसी महान विभूतियों का जन्म हुआ। उन्होंने कहा कि इन दोनों नेताओं ने भारत की अस्मिता, एकता और गौरव को नई दिशा दी। साथ ही उन्होंने महाराजा बिजली पासी की जयंती का उल्लेख करते हुए उन्हें भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
PM मोदी ने कहा कि लखनऊ की धरती आज एक नई प्रेरणा की साक्षी बन रही है। 65 एकड़ में फैला राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल केवल स्मारक नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र है। उन्होंने बताया कि जिस भूमि पर यह परिसर बना है, वहां कभी कूड़े का पहाड़ हुआ करता था, जिसे पिछले तीन वर्षों में हटाकर एक ऐतिहासिक स्थल में बदला गया।
प्रधानमंत्री ने अटल जी को सुशासन का प्रतीक बताते हुए कहा कि लंबे समय तक केवल नारेबाजी को ही सुशासन समझा गया, लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी ने सुशासन को जमीन पर उतारकर दिखाया। उन्होंने यह भी कहा कि आज जिस डिजिटल इंडिया की चर्चा होती है, उसकी नींव अटल जी के कार्यकाल में ही रखी गई थी।
PM मोदी ने अपनी सरकार के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि बीते दशक में करोड़ों भारतीय गरीबी से बाहर निकले हैं। उन्होंने बताया कि 2014 से पहले जहां केवल 25 करोड़ लोग सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में थे, आज यह संख्या बढ़कर करीब 95 करोड़ तक पहुंच चुकी है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने आदिवासी और पिछड़े वर्गों के योगदान को याद करते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने भगवान बिरसा मुंडा, महाराजा सुहेलदेव और निषादराज जैसे महापुरुषों को सम्मान देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र प्रेरणा स्थल उसी विचारधारा का प्रतीक है, जो सेवा, समर्पण और आत्मसम्मान पर आधारित है।