भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। नई दिल्ली स्थित ‘सदैव अटल’ स्मारक पर पहुंचकर प्रधानमंत्री ने पुष्पांजलि अर्पित की और देश के इस महान नेता के योगदान को याद किया। यह अवसर केवल श्रद्धांजलि का नहीं, बल्कि अटल जी के विचारों और आदर्शों को आत्मसात करने का भी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर सोशल मीडिया के माध्यम से अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व और उनके राजनीतिक मूल्यों पर प्रकाश डाला। पीएम मोदी ने लिखा कि अटल जी का जीवन और उनका सार्वजनिक आचरण आज भी देशवासियों को निरंतर प्रेरित करता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी व्यक्ति की श्रेष्ठता उसके पद से नहीं, बल्कि उसके आचरण, व्यवहार और सिद्धांतों से तय होती है।
पीएम मोदी ने अटल जी को भारतीय राजनीति का एक ऐसा स्तंभ बताया, जिन्होंने गरिमा और मर्यादा को हमेशा बनाए रखा। चाहे सत्ता में हों या विपक्ष में, अटल बिहारी वाजपेयी ने राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखा। उनकी वैचारिक दृढ़ता और संवाद की शैली ने राजनीतिक मतभेदों के बीच भी सम्मान की संस्कृति को जीवित रखा।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अटल जी की जयंती हम सभी को उनके जीवन मूल्यों से सीख लेने का अवसर देती है। उनका शांत स्वभाव, लोकतंत्र में अटूट विश्वास और देश के लिए समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक है। पीएम मोदी ने संस्कृत की एक उक्ति साझा करते हुए कहा कि महान नेताओं के कार्य समाज को दिशा दिखाते हैं, और अटल जी का पूरा जीवन इस कथन का सजीव उदाहरण है।
अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने परमाणु शक्ति के रूप में वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाई, बुनियादी ढांचे को मजबूती दी और विदेश नीति में संतुलन का परिचय दिया। वे ऐसे नेता थे, जिनकी स्वीकार्यता दलगत सीमाओं से ऊपर थी। उनकी कविता, भाषण और विचार आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह श्रद्धांजलि इस बात का प्रमाण है कि अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की आत्मा का प्रतीक थे। उनका जीवन और आदर्श आने वाले समय में भी देश को दिशा देते रहेंगे।