600 ट्रेनी IAS हुए चुप—49 सेकंड बाद मिला सही जवाब

न्यूज़ राष्ट्रीय

मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में इन दिनों देश के भावी प्रशासनिक अधिकारियों का प्रशिक्षण चल रहा है। यह वही स्थान है जहां भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) सहित अन्य अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी अपने करियर की शुरुआत से पहले कठोर प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। लेकिन हाल ही में यहां एक ऐसा दिलचस्प वाकया हुआ जिसने सभी को हैरान कर दिया। अवसर था 100वें कॉमन फाउंडेशन कोर्स के समापन समारोह का, जहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। गंभीर माहौल, उत्सुक निगाहें और भविष्य के कर्णधारों से भरा पूरा सभागार—ऐसे में एक हल्का-फुल्का सवाल भी चर्चा का विषय बन गया। रक्षा मंत्री अपने भाषण के दौरान अचानक रुक गए और बोले—“मैं आप सभी से एक छोटा सा सवाल पूछना चाहता हूं।” UPSC जैसी सबसे कठिन परीक्षा पास कर यहां पहुंच चुके लगभग 600 युवा अफसर तुरंत सतर्क हो गए। उन्हें लगा कि कोई प्रशासन, नीति या शासन से जुड़ा प्रश्न आने वाला है। लेकिन जो सवाल पूछा गया, वह कक्षा 6-7 स्तर का शुद्ध गणित का प्रश्न था। यही बात सभी के लिए और अधिक चौंकाने वाली साबित हुई।

राजनाथ सिंह ने पूछा:
“एक व्यक्ति के पास कुछ पैसे थे। उसने आधे पैसे ‘A’ को दे दिए, एक-तिहाई ‘B’ को दे दिए, और जो बचा वह 100 रुपये ‘C’ को दे दिए। बताइए, उस व्यक्ति के पास कुल कितने पैसे थे?”

सवाल सुनने में बेहद आसान था, लेकिन पूरे सभागार में अचानक सन्नाटा छा गया। भारत की सबसे कठिन परीक्षा पास कर चुके, देश के सबसे तेज दिमाग माने जाने वाले इन 600 अधिकारियों में से कोई भी तुरंत जवाब नहीं दे सका। लगभग आठ सेकंड तक हॉल बिल्कुल शांत था। सभी सोच रहे थे, पर कोई जवाब देने की हिम्मत नहीं कर रहा था। आखिरकार एक ट्रेनी ने जवाब दिया—3000। लेकिन रक्षा मंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा—“गलत, फिर से सोचिए।”

इस जवाब के गलत होने के बाद माहौल में थोड़ा तनाव और थोड़ी झिझक दोनों बढ़ गईं। सभी इस बात को समझ रहे थे कि यह कोई पेचीदा सवाल नहीं है, केवल मानसिक गणना का खेल है। लेकिन शायद मंच का दबाव, वरिष्ठता का सम्मान और तुरंत उत्तर देने का डर सबके दिमाग पर भारी था। आधुनिक दौर में कैलकुलेटर और स्मार्टफोन्स पर निर्भरता के कारण मानसिक गणना (Mental Math) की आदत कम हो जाना भी एक बड़ा कारण रहा।

करीब 49 सेकंड बीत चुके थे। तभी हॉल के एक कोने से एक साफ आवाज आई—“सर, 600!”
रक्षा मंत्री ने तुरंत प्रतिक्रिया दी—“किसने कहा 600?”
एक ट्रेनी अधिकारी ने हाथ उठाया। रक्षा मंत्री मुस्कुरा उठे और बोले—“बिल्कुल सही जवाब।”

इस छोटे से सवाल ने यह दिखा दिया कि कभी-कभी सरल प्रश्न ही लोगों को अधिक उलझा देते हैं। यह घटना यह भी समझाती है कि कठिन से कठिन प्रतियोगी परीक्षा पास करना एक बात है, लेकिन तुरंत सोचने और मानसिक गणना करने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। राजनाथ सिंह का यह सवाल केवल मजाकिया अंदाज में पूछा गया था, लेकिन इसने सभी ट्रेनी अधिकारियों को एक हल्का-फुल्का और यादगार सबक भी दे दिया।

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