UP Election 2027: यूपी में कुर्मी वोटबैंक पर BJP की नजर, अखिलेश यादव भी बना रहे रणनीति

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दल जातीय समीकरणों को साधने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नजर प्रदेश के कुर्मी वोटबैंक पर है। पार्टी ने सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के जरिए इस समुदाय तक पहुंच बनाने की तैयारी की है। वहीं, समाजवादी पार्टी (SP) भी इसी दिन वाराणसी से अपने चुनावी अभियान की शुरुआत करने की संभावित रणनीति पर काम कर रही है। हालांकि, सपा की ओर से वाराणसी में प्रस्तावित कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

31 अक्टूबर को सरदार पटेल की जयंती के अवसर पर यूपी बीजेपी पिछड़ा मोर्चा प्रदेश के सभी 98 संगठनात्मक जिलों में कार्यक्रम आयोजित करेगा। पार्टी की इस तैयारी को कुर्मी समाज के बीच अपनी राजनीतिक और सामाजिक पहुंच मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

बीजेपी ने संगठन में कुर्मी नेताओं को दी अहम जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश में बीजेपी के संगठनात्मक बदलावों के बीच कुर्मी समुदाय से आने वाले नेताओं की भूमिका चर्चा में है। पार्टी ने विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया है, जबकि गुजरात के पूर्व विधायक जगदीश पटेल को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों नेताओं का संबंध कुर्मी समुदाय से बताया जाता है।

इससे पहले बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री और महाराजगंज से सांसद पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश इकाई की कमान सौंपी थी। पंकज चौधरी भी कुर्मी समाज के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं।

इसके अलावा, पूर्व सांसद रेखा वर्मा को बीजेपी के केंद्रीय संगठन में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी पर बनाए रखा गया है। पार्टी का अपना दल (सोनेलाल) के साथ गठबंधन भी उत्तर प्रदेश में उसकी पिछड़ा वर्ग राजनीति का अहम हिस्सा रहा है। अपना दल (एस) की प्रमुख अनुप्रिया पटेल केंद्र सरकार में मंत्री हैं और कुर्मी समुदाय की प्रमुख राजनीतिक नेताओं में शामिल हैं।

इन संगठनात्मक नियुक्तियों और सहयोगी दलों की भूमिका को प्रदेश में ओबीसी मतदाताओं के बीच राजनीतिक आधार मजबूत करने की व्यापक रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है।

अखिलेश यादव भी 31 अक्टूबर को कर सकते हैं बड़ा ऐलान

दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी भी कुर्मी मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी में जुटी है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर वाराणसी से चुनावी अभियान का आगाज कर सकते हैं।

इस संभावित कार्यक्रम के लिए वाराणसी की रोहनिया विधानसभा सीट पर रैली आयोजित करने की चर्चा है। यह क्षेत्र कुर्मी समाज की अच्छी-खासी आबादी के लिए जाना जाता है। हालांकि, समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक कार्यक्रम को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

सूत्रों के मुताबिक, सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने हाल ही में वाराणसी पहुंचकर स्थानीय नेताओं के साथ बैठक की थी। इसके बाद से ही रैली की तैयारियों और संभावित आयोजन स्थल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

अगर यह कार्यक्रम आयोजित होता है, तो इसे पूर्वांचल में कुर्मी मतदाताओं के बीच सपा की राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।

यूपी की राजनीति में कितना अहम है कुर्मी वोटबैंक?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में कुर्मी समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक, प्रदेश की आबादी में कुर्मी समाज की हिस्सेदारी करीब 4 से 5 प्रतिशत बताई जाती है। इसकी राजनीतिक मौजूदगी पूर्वांचल, अवध, रुहेलखंड और बुंदेलखंड के कई इलाकों में है।

कुर्मी मतदाताओं की मौजूदगी महाराजगंज, संत कबीर नगर, बस्ती, बाराबंकी, फतेहपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी, प्रयागराज, मिर्जापुर, सोनभद्र और बरेली समेत कई जिलों में बताई जाती है। राजनीतिक विश्लेषणों में करीब 50 से 60 विधानसभा सीटों पर इस समुदाय के मतदाताओं को प्रभावशाली माना जाता है, जबकि लगभग 130 सीटों पर उनकी मौजूदगी का उल्लेख किया जाता है।

हालांकि, किसी भी समुदाय का मतदान व्यवहार हर चुनाव में एक जैसा नहीं रहता। स्थानीय उम्मीदवार, गठबंधन, क्षेत्रीय मुद्दे और राजनीतिक परिस्थितियां भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करती हैं।

2022 में कुर्मी मतदाताओं ने किसे दिया था समर्थन?

CSDS-Lokniti के हवाले से दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कुर्मी मतदाताओं के मतदान का अनुमानित पैटर्न इस प्रकार था:

  • NDA: 66 प्रतिशत
  • समाजवादी पार्टी: 25 प्रतिशत
  • कांग्रेस: 4 प्रतिशत
  • बहुजन समाज पार्टी: 3 प्रतिशत
  • अन्य: 2 प्रतिशत

इन आंकड़ों के मुताबिक, 2022 में कुर्मी मतदाताओं के बीच NDA को सबसे अधिक समर्थन मिला था। बीजेपी और अपना दल (एस) का गठबंधन इस सामाजिक आधार के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा है। हालांकि, आगामी चुनाव में मतदाताओं का रुख क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

विधानसभा और लोकसभा में कुर्मी नेताओं की मौजूदगी

दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों में कुर्मी समुदाय से संबंधित करीब 40 विधायक हैं। इनमें बीजेपी के 27, समाजवादी पार्टी के 12 और कांग्रेस का एक विधायक शामिल बताया गया है।

लोकसभा में भी कुर्मी समुदाय के कई प्रमुख नेता सक्रिय हैं। बीजेपी के पंकज चौधरी और छत्रपाल सिंह गंगवार, अपना दल (एस) की अनुप्रिया पटेल और समाजवादी पार्टी के विभिन्न सांसद इस समुदाय के प्रमुख राजनीतिक चेहरों में गिने जाते हैं।

2027 के चुनाव में क्यों अहम होगी 31 अक्टूबर की तारीख?

सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर बीजेपी और सपा की संभावित गतिविधियां उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक समीकरणों के महत्व को रेखांकित करती हैं। बीजेपी संगठनात्मक कार्यक्रमों के जरिए अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है, जबकि सपा वाराणसी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में कार्यक्रम आयोजित करने की संभावना तलाश रही है।

फिलहाल, सपा की प्रस्तावित रैली की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों दल कुर्मी समाज के मुद्दों, प्रतिनिधित्व और राजनीतिक भागीदारी को लेकर क्या रणनीति अपनाते हैं।

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