बलरामपुर में श्रीराम जन्मभूमि के पक्षकार के पुत्र को मिला आमंत्रण

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published by saurabh

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बलरामपुर,(वार्ता): अयोध्या में आगामी पांच अगस्त (बुधवार) को श्री राममंदिर निर्माण भूमि पूजन कार्यक्रम में श्रीराम जन्मभूमि के पक्षकार रहे स्वर्गीय गोपाल सिंह विशारद के पुत्र राजेंद्र सिंह को भी आमंत्रित किया गया है । श्री जन्मभूमि ट्रस्ट की ओर से भेजे गये निमंत्रण पत्र पाकर जहां एक ओर विशारद परिवार गदगद दिख रहा हैं वहीं दूसरी ओर बलरामपुर जिला वासियों मे भी हर्ष हैं । मेहमान के तौर पर अयोध्या बुलावे के बाद “यूनीवार्ता” से बातचीत में राजेंद्र सिंह नें मंगलवार को यहां बताया कि उनके पिता गोपाल सिंह विशारद ने 1950 में न्यायालय में हिंदू पक्ष की ओर से पहली याचिका दायर की थी। श्री गोपाल सिंह विशारद उस समय फैजाबाद के प्रतिष्ठित वकील थे। 1949 में विवादित परिसर में रामलला के प्रकटीकरण के बाद जब ताला लगा दिया गया था। अंदर प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया था। गोपाल सिंह विशारद ने न्यायालय में पहली याचिका दायर कर अपने लिए पूजा का अधिकार मांगा था। नौ नवंबर 2019 को उच्चतम न्यायालय ने अपने निर्णय में गोपाल सिंह विशारद को पूजा का अधिकार दिया।

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हालांकि, गोपाल सिंह विशारद कि 1986 में ही मृत्यु हो गई थी। उनकी मृत्यु के पश्चात उनके पुत्र राजेन्द्र सिंह इस मुकदमे की पैरवी कर रहे थे। 86 वर्षीय राजेंद्र सिंह बैंक के अवकाश प्राप्त प्रबंधक हैं और बलरामपुर में निवास करते हैं। पांच अगस्त को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से राजेंद्र सिंह को भूमि पूजन कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है। उच्चतम न्यायालय में मुकदमों में हिंदू पक्ष के संयोजक त्रिलोकी नाथ पांडे ने राजेंद्र सिंह से चार अगस्त तक आयोध्या पहुंच जाने का आग्रह किया है.वहीं, आमंत्रण मिलने के बाद राजेंद्र सिंह ने कहा कि यह पल मेरे लिए अविस्मरणीय है।
श्री राजेंद्र सिंह ने कहा कि इस मुकदमे की पैरवी करते हुए कभी-कभी एहसास होता था कि पता नहीं उनके जीवनकाल में ही फैसला आ पाएगा या नहीं। उन्होंने कहा कि फैसला आया और आज मंदिर निर्माण की शुभ घड़ी भी आ गई है जो मेरे लिए अगाध प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कहा कि 500 वर्षों से मंदिर निर्माण को लेकर संघर्ष चलता रहा है। उन्होंने कहा कि देश में हिंदू विचारधारा और राष्ट्रीय भावना वाली सरकार न होती तो अगले 500 वर्षों तक प्रभु श्री राम का मंदिर बन पाना मुश्किल होता। उनकी अंतिम इच्छा यही है कि वे भव्य राम मंदिर में प्रभु श्रीराम के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य कर सके ।

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