मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डीपफेक जैसी तकनीकों के दौर में अपराधी कितना भी तकनीक का आवरण ओढ़ ले, उत्तर प्रदेश की वैज्ञानिक और विधिक क्षमता उसे खोज निकालेगी। एआई हमारे लिए मददगार हो सकता है, लेकिन उसे निर्णायक नहीं बनना चाहिए। तकनीक का संचालन मानव विवेक से होना चाहिए, न कि मनुष्य तकनीक के विवेक पर निर्भर हो जाए। पूरी तरह एआई पर निर्भरता भविष्य में संकट बन सकती है। वैज्ञानिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक जांच और आधुनिक तकनीक के समन्वय से अपराध अनुसंधान को प्रभावी बनाने के साथ न्याय मिलने में होने वाली देरी को भी कम किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री शनिवार को लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘टेक संगम 2026’ के दूसरे दिन के कार्यक्रम का उद्घाटन कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने क्वांटम फॉरेंसिक्स और विधिक अनुपालन के क्षेत्र में कार्य करने वाले ‘LEXQ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का शुभारंभ किया। साथ ही कंसेंट मैनेजमेंट पोर्टल लॉन्च किया, ‘अभेद्य’ परियोजना की आधारशिला रखी और ‘एआई इन कंस्ट्रक्शन’ पुस्तक का अनावरण किया। सम्मेलन में साइबर सुरक्षा, डिजिटल साक्ष्य, क्वांटम तकनीक, फॉरेंसिक विज्ञान और एआई के न्यायिक व प्रशासनिक उपयोग पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।