Digital festival: सुन लो अगर न सम्भले तुम बम ये फट जाएगा

उत्तर प्रदेश लखनऊ न्यूज़
published by Imran

डिजिटल उत्सव सामाजिक जागरूकता का हुआ समापन

– अंतिम दिन भी जन जागरूकता मुद्दों पर हुआ लाइव परफॉर्मेंस
– पारिवारिक एकता, प्रवासी मजदूरों का दर्द, स्पोर्ट्स को बढ़ावा, से नो टू प्लास्टिक, अडल्ट एजुकेशन आदि मुद्दों पर हुई प्रस्तुतियां
लखनऊ। अंजली फिल्म प्रोडक्शन एवं सीटीसीएस फैमिली द्वारा चलाए जा रहे डिजिटल उत्सव सामाजिक जागरूकता का रविवार को विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर प्रस्तुतियों के द्वारा समापन हुआ। पांच दिवसीय इस लाइव सेशन डिजिटल उत्सव में यूपी, बिहार, हैदराबाद एवं गुजरात सहित लखनऊ के कई कलाकारों ने सामाजिक जागरूकता के तीस से अधिक थीम पर अपनी प्रस्तुतियां दी। रविवार को डिजिटल उत्सव के आखिरी दिन भी सामाजिक प्रस्तुतियों को करने के बाद कार्यक्रम का समापन किया गया। अंजली फिल्म प्रोडक्शन के फेसबुक पेज पर चल रहे डिजिटल उत्सव को जनता का अपार सहयोग एवं प्यार प्राप्त हुआ ।
लाइव सेशन के आखिरी दिन
आम जनमानस द्वारा प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करने का उद्देश्य लिए यथार्थ सिंह कार्की ने अगर सुन लो न संभले तुम बम यह फट जाएगा, किस तरह की नादानियां कर रहे हैं हम अपनी ही धरती पर जहर भर रहे हैं हम पर नृत्य एवं एक्ट के माध्यम से प्लास्टिक पॉल्युशन के ख़िलाफ़ अपनी प्रस्तुति दी। इसी के साथ यथार्थ ने देश भक्ति गीत पर भी नृत्य प्रस्तुत किया।
भूमिका गुप्ता ने एडल्ट एजुकेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य को अपनी थीम में प्रस्तुत किया, जिसके तहत भूमिका ने शिक्षा का सूरज है निकला हो रहा है अब उजाला एवम यह हौसला कैसे झुके यह आरजू कैसे रूके पर गायन प्रस्तुत किया एवं एडल्ट एजुकेशन की ज़रूरत क्यों है विषय पर स्पीच भी दर्शकों के समक्ष रखी। लक्ष्य सहगल ने सोशल मीडिया के कारण परिवार में बढ़ रही दूरी के विषय में कॉमेडी एक्ट, स्पीच एक्ट एवं कविता गायन के द्वारा दर्शकों से सोशल मीडिया का लिमिटेड उपयोग करने का आवाहन किया।
बाल कलाकार रूद्र पांडे ने स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वेस्टर्न गानों के माध्यम से दर्शकों से आवाहन किया कि बच्चों को खेलों की तरफ भी आकर्षित करें, इससे शरीर और मन स्वस्थ रहता है। परी सहगल ने प्रवासी मजदूरों के दर्द को कविताओं के माध्यम से प्रस्तुत किया जिनमें शीर्षक अपने घर जाने को है मजबूर हम सब हैं प्रवासी मजदूर एवं वक्त ही तो है गुजर जाएगा सुबह का नया सूरज फिर आएगा कविता प्रस्तुत की।
शहर की उभरती बाल गायिका बानी चावला ने परिवार की एकजुटता को अपना उद्देश्य बनाकर एक से बढ़कर एक गीत प्रस्तुत किए प्यारे दादाजी हैं सबसे अनमोल, पापा को पाया तो रब को पाया, तू कितनी अच्छी है तू कितनी प्यारी है, ये तो सच है की भगवान है आदि विभिन्न प्रकार के गीतों के माध्यम से दर्शकों से परिवार में एकता बनाकर रहने का आवाहन किया।
प्रज्ञा शर्मा ने सेल्फ डिफेंस सीखने पर जोर देने के साथ ही लाइव सेशन के दौरान ताइक्वांडो के कुछ सामान्य स्टेप्स बताए। इप्शिता अरोरा ने डॉक्टर, पुलिस, सैनिक एवं किसानों को समर्पित गीत नृत्य एवं पर्यावरण जागरूकता पर एक्ट एवम नृत्य किया। गुजरात से शिवांगी एन चौहान ने समाज मे फैली बेटियों के प्रति घिनौनी मानसिकता एवं कानून व्यवस्था पर अपनी प्रस्तुतियां देकर बदलाव लाने का आवाहन किया। खनक पाल ने समाज मे शिक्षक का महत्व पर कविताये और नृत्य प्रस्तुति टीचर को हमारा प्यार किया।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में आलोक अग्रवाल, मनोज कुमार, अजंली पांडेय, बृजेन्द्र बहादुर मौर्य, आनंद चौधरी, निधि श्रीवास्तव,अजय जैसवाल ग्राफिक डिज़ाइनर, संदीप उपाध्याय एवं अर्चना पाल का विशेष सहयोग रहा।
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