मंझधार में पशु चिकित्सकों की नाव, गोवंशियों को बचायें या फिर करें चुनाव में ड्यूटी

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एस.वी. सिंह उजागर 
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी के पशुपालन विभाग के चिकित्सक इस समय बेहद पशोपेष में हैं, उनके लिए एक तरफ कुआं है तो दूसरी तरफ खाई जैसी स्थित बन गयी है। दरअसल बीते रविवार को अपर मुख्य सचिव पशुधन मनोज सिंह ने गर्मी को देखते हुए प्रदेश भर में सभी गोशालाओं में गोवंशियों को चारा, दाना पानी और चिकित्सा के समुचित प्रबंध करने के निर्देश जारी किये हैं जब कि पहले से ही चिकित्सकों और कर्मचारियों के अभाव का रोना रो रहे पशुपालन विभाग के ज्यादातर पशुचिकित्सकों की ड्यूटी प्रदेश में घोषित त्रिस्तरी पंचायत चुनाव में लगा दी गयी है। इससे पशु चिकित्सकों के  सामने गंभीर स्थिति बन गयी है कि यदि वह एक महीने के लिए चुनावी ड्यूटी करने चले गये और ऐसे में गायों को कुछ हो जाता है तो मुख्यमंत्री योगी की टेढ़ी नजर हो जायेगी और यदि चुनाव में ड्यूटी नही करते हैं तो चुनाव आयोग उन पर चढ़ायी कर सकता है।

विभाग में पहले से ही चल रहा है पशु चिकित्सकों की कमी का रोना 

पशुपालन विभाग में पहले से ही चिकित्सकों का रोना चल रहा था, ऊपर से ज्यादातर चिकित्सक एवं पशु चिकित्सा  कर्मियों की चुनाव में ड्यूटी लग जाने से यह कोढ़ में खाज जैसा हो गया है। बुंदेलखण्ड जनपद में तो समस्या और बदतर है यहां एक पशु चिकित्सक पर 10 से 50 गोआश्रय स्थलों को संभालने की जिम्मेदारी है। जनपद कुशीनगर में 25 अस्पताल मात्र 5 पशुचिकित्सकों के भरोसे चल रहे हैं, वहीं बदायुं जनपद में 26 अस्पतालों में मात्र 12 चिकित्सक तैनात हैं। ऐसे में इन पशु चिकित्सकों की दूसरे तहसीलों में चुनावी ड्यूटी लगाना किसी के भी समझ से परे है. इमरजेंसी चिकित्सा सेवा में लगे पशु चिकित्सकों को भी चुनाव में लगाया गया है ऐसे में बेजुबान पशुओं का इलाज किसके भरोसे चलेगा यह बताने के लिए कोई तेयार नही है।

उत्तर प्रदेश पशु चिकित्सा संघ ने लिखी राज्य निर्वाचन  आयोग को चिट्ठी

डॉ राकेश  कुमार, अध्यक्ष उत्तर प्रदेश पशु चिकित्सा संघ

उक्त प्रकरण पर खामोशी अख्तियार किये बैठे निदेशक पशुपालन डा. संतोष मलिक से चिकित्सकों ने एक माह की चुनावी ड्यूटी के दौरान पशुओं के इलाज में आने वाली दिक्कतों से अवगत कराया लेकिन इसका कोई समाधान नही निकल सका। अंत में उत्तर प्रदेश पशु चिकित्सा संघ ने चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखकर उक्त के संदर्भ में होने वाली दिक्कतों  से अवगत कराते हुए पशु चिकित्सकों को चुनावी ड्यूटी से बाहर रखने की अपील की। संघ के अध्यक्ष डा. राकेश कुमार ने राज्य निर्वाचन आयोग को भेजे पत्र में अनुरोध किया कि प्रदेश के पांच लाख गोवंशियों की सुरक्षा और संरक्षा की जिम्मेदारी चंद चिकित्सकों के कंधो पर रहती है अतः चुनाव में ड्यूटी लगने से इसके कई तरह के दुश्परिणाम आ सकते हैं। उन्होने पशु चिकित्सा सेवा को आकस्मिक सेवा में होने का हवाला देते हुए चुनावी ड्यूटी से सभी पशु चिकित्सकों को अवमुक्त रखे जाने की मांग उठायी। उन्होंने कहा की चुनाव आयोग की हेडबुक में भी पशु चिकित्सकों को चुनाव ड्यूटी से अवमुक्त रखा गया है।

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